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Generation of Great Tabla Players

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पंडित राम सहाय जी से IMPORTANT VIDEOS

Jhap Taal Kayda

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  ऊपर दिए गए नोटेशन को किस तरह बजाना है यह नीचे दिए गए वीडियो के माध्यम से आप समझ सकते हैं । कृपया इस वीडियो को जरूर देखें। झप ताल कायदा अन्य महत्वपूर्ण वीडियोस More important videos

Tabla Gharana Full Information

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तबले के विभिन्न घराने और उनकी वादन शैलियाँ  इसका जन्म दिल्ली में हुआ और प्रथम तबला वादक उस्ताद सिद्धार खाँ हुए । सिद्धार खाँ की वंश - परम्परा तथा शिष्य - परम्परा ने तबले के दिल्ली घराने की नींव डाली । फिर धीरे - धीरे तबलिये देश के दूसरे भागों में फैले , वहाँ की सामाजिक परिस्थितियों तथा स्थानीय सङ्गीत ने उनकी वादन शैलो पर क्रमशः प्रभाव डाला और शनैः शनैः विभिन्न घरानों का जन्म हुआ जो अपनी निजी विशेषताओं के कारण अपना अलग अस्तित्व रखने लगे । तबले के घरानों में दिल्ली का घराना आदि हैं । अतः हम सर्वप्रथम उसी घराने परम्परा तथा वादन - शैली पर विचार करेंगे ।  (  Advertisement)   दिल्ली   घराना घराना उस्ताद सिद्धार खाँ के तीन शिष्य तथा तीन पुत्र विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं । शिश्य में बुगरा खाँ , घसीट खाँ ) अपने पुत्रों के द्वारा में उस्ताद रोशन खाँ , उस्ताद कल्लू खाँ तथा उस्ताद तुल्लन खाँ , और खाँ तथा तीसरे का नाम अज्ञात है , परन्तु वह इतिहास में विशेष महत्व रखते हैं । सिताब खाँ विद्वान तबलिये हुए , जिनके पुत्र नजर अलो तथा नाती बड़े काले खाँ ने अपने समय में काफी नाम...

तीन ताल कायदा, अजराडा घराना

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अजराड़ा घराना , तीन ताल कायदा ऊपर दी हुई नोटेशन को किस प्रकार बजाना है वह इस वीडियो में विस्तार से समझाया गया है कृपया जरूर देखें। Amazon products " style="display: block; padding: 1em 0px; text-align: left;" target="_blank"> Professional studio recording bundle. Click here -  https://amzn.to/3sNo2mn

Pt Samta Prasad ji Tabla

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  पं ० शाम्ता प्रसाद  वाराणसी के सुप्रसिद्ध तबला वादक पं ० शाम्ता प्रसाद अपने उपनाम " गुदई महाराज " के नाम से संगीत जगत में अधिक प्रसिद्ध हैं । आपका जन्म वाराणसी संगीतज्ञों के मुहल्ले कबीर - चौरा में जुलाई सन् १६२१ ई ० में हुआ । आपके पिता का नाम पंडित वाचा मिश्र था । वाचा महाराज अपने समय के प्रसिद्ध तबला वादकों में से थे । परन्तु दुर्भाग्यवश बालक शान्ता आठ वर्ष की छोटी उम्र में ही पिता की छत्रछाया से वंचित हो गए ।  इस प्रकार से पिता से कुछ ही दिन शिक्षा प्राप्त कर पाये थे । फलतः गुदई महराज को बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ा । कुछ दिनों के बाद आप पंडित बलदेव सहाय जी के शिष्य पं ० महराज से तालीम लेने लगे । यह क्रम कई वर्षों तक चलता रहा । पं ० शाम्ता प्रसाद बचपन से ही घोर परिश्रमी थे । अतः अपने परिश्रम से गुरू को सब कुछ सिखा देने के लिए बाध्य कर दिया । आपका जीवन आरम्भ से ही अत्यन्त संघर्षपूर्ण रहा है । परन्तु जिस साहस और कठिनाई से आपने उसका सामना किया वह दूसरों के लिए आज आदर्श बन गया है । पं ० शाम्ता प्रसाद की ख्याति इलाहाबाद के सन् १६४२ के संगीत सम्मे लन से बढ़ी । यह आपके जीव...

Teen Taal Rela | तीन ताल रेला

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  रेले का महत्व तबला वादन में रेले का उतना ही महत्व है, जितना अन्य बंदिशों का रेला एक ऐसा आविष्कार है विद्वानों का जो लोगों को बहुत आकर्षक करता है और इस तरह की बंदिशें किसी भी वादक की क्षमता को दर्शाती है। रेली के बोल बहुत कम होते हैं यह दो प्रकार के होते हैं एक रेल आता तथा कायदे से निर्मित खेला रैली को द्रुत गति में ही बजाना चाहिए या ठुमरी और ख्याल गायकी मैं भी उसका उपयोग हो जाता है बिल्कुल लगी और लड़ी की तरह ।रागों में solo वादन में जहां जहां पर आवश्यकता हो वहां इसका उपयोग बहुत ख़ूबसूरती के साथ किया जाता है । कैसे हुआ आविष्कार  कुछ विद्वानों के अनुसार रेल के इंजन का आविष्कार हुआ तब उसकी ध्वनि से प्रभावित होकर विद्वानों ने तबले के बोलों को रेल की ध्वनि जैसा बनाने का प्रयास किया और वह सफल हुए और उसका नाम रेला रखा गया। जो वास्तविक लगता है रे ले में इस तरह के बोलूंगा प्रयोग किया जाता है कि वह बजने पर रेल की गति जैसा या रेल की ध्वनि जैसा प्रतीत हो जब रेल का इंजन दौड़ता है परियों पर तब उसमें जो भिन्न-भिन्न प्रकार की दुनियां निकलती है उसी की आवाज को तब लेकर बोलो...

Jhap Taal Peshkar

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  पेशकार, पल्टा तथा तिहाई सहित झपताल पेशकार से संबंधित वीडियो ( More videos )