पारिभाषिक शब्दों की व्याख्या ( तबला )
ताल - भारतीय सङ्गीत में ताल का स्थान अत्यन्त महत्वपूर्ण माना गया है । पाश्चात्य सङ्गीत में ताल का यह रूप देखने में नहीं आता । सङ्गीत में समय नापन के साधन को ताल कहते हैं , जो विभिन्न मात्राओं द्वारा बनाया जाता है , जैसे तीनताल में १६ मात्रे , झपताल में १० मात्रे या दादरा में ६ मात्रे . बोल - यह तबले या पखावज का अत्यन्त व्यापक शब्द है । इसके अन्तर्गत वे सभी शब्द - समूह या वर्ण - समूह आते हैं , जो तबले के वर्गों से बने हुये होते . हैं । अतः इसके अन्तर्गत गत , कायदा , टुकड़ा , परन , रेला आदि सभी कुछ आ जाता है । यही कारण है कि हम बोल के उदाहरण में किसी विशेष प्रकार की रचना को नहीं रख सकते । ठेका - तबले या पखावज पर बजाने के लिये विभिन्न तालों की रचना की गई है । प्रत्येक ताल के वजन के अनुकूल जो विभिन्न बोलों या वर्गों की सहायता से रचना होती है , उसके शुद्ध रूप को ठेका कहते हैं । अतः किसी भी ताल की मात्राओं को तबले के वर्गों की सहायता से वाद्य पर बजाने योग्य बोल समूह को ही ठेका कहते हैं । इसका प्रयोग वादन में सर्वप्रथम किया जाता है । उदाहरण के लिये १० मात्रे की झपताल का ठेका द...