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Peshkar ( पेशकार , तीन ताल )
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पेशकार
' पेशकार ' फारसी का शब्द है , जिसका अर्थ है , पेश करने वाला , उपस्थित करने वाला या परिचय देने वाला । पेशकार अदालतों में हुआ करते हैं । इसी से पेशकारा शब्द की उत्पत्ति हुई है । तबला सोलो बजाने में इसका स्थान सर्व प्रथम आता है । पेशकारे और कायदे की विशेषताओं में बहुत कुछ समानता है । इसलिए हम कह सकते हैं कि पेशकारा सुन्दर बोलों से युक्त एक प्रकार का कायदा है | कायदे समान इसमें भी पल्टे किये जाते हैं । परन्तु पल्टे करने में कायदे के पल्टों के समान कठोर नियमों का पालन नहीं करना पड़ता । पेशकारे की लय समान कायदों की अपेक्षा सुन्दर व डगमगाती हुई होती है । जिसका आनन्द मध्य लय में ही रहता है । इसलिये पेशकारा तेज लय में नहीं बजाया जाता।
उदाहरण देखिए -
पल्टा -2>
तिहाई
विस्तारशील वर्ग के अन्तर्गत सम्मिलित रचनाओं में वर्ण रचना की दृष्टि से सर्वाधिक क्लिष्ट तथा जटिल रचना होती है ' पेशकार ' ! इस रचना का निर्माण हो इस विचार से हुआ है कि यह लय - ताल में निबद्ध होते हुए भी अनिबद्ध - सी प्रतीत हो । इसीलिए इसमें प्रयुक्त वर्णों की समयावधि में कायदे तथा रेले में प्रयुक्त वर्णों की समयावधि की अपेक्षा काफी अधिक विषमता पाई जाती है , जिससे इसे बजाते समय इसमें प्रयुक्त कुछ वर्ण मात्रा के आरम्भ स्थान से च्युत हो जाते हैं । इसी कारण इसे लिपिबद्ध करते समय कुछ मात्राओं का आरम्भ किसी वर्ग से न होकर अवग्रह से होता है । कुछ वर्षों के मात्रा के आरम्भ - स्थान से च्युत होने के फलस्वरूप जहाँ यह रचना अनिबद्ध सो प्रतीत होती है , वहीं इसकी चाल भी कुछ डगमगाती - सी प्रतीत होती है । इस रचना में प्रायः खुले और संयुक्त वर्णों की समयावधि अन्य वर्णों की अपेक्षा कुछ अधिक रखी जाती है , जिससे इन संयुक्त वर्णों में दाएँ - बाएँ का संतुलन बनाए रखने में सुविधा होती है । अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण पेशकार की रचना सर्वाधिक क्लिष्ट एवं जटिल मानी जाती है । लय और वजन में परिवर्तन भी पेशकार के विस्तार में स्वीकार्य है , जबकि कायदे और रेले के विस्तार में इसे निषिद्ध माना जाता है । कायदे और रेले की अपेक्षा पेशकार के विस्तार में काफी अधिक स्वतन्त्रता उपलब्ध है ।
ऊपर दिए गए नोटेशन को किस तरह बजाना है यह नीचे दिए गए वीडियो के माध्यम से आप समझ सकते हैं । कृपया इस वीडियो को जरूर देखें। झप ताल कायदा अन्य महत्वपूर्ण वीडियोस More important videos
रेले का महत्व तबला वादन में रेले का उतना ही महत्व है, जितना अन्य बंदिशों का रेला एक ऐसा आविष्कार है विद्वानों का जो लोगों को बहुत आकर्षक करता है और इस तरह की बंदिशें किसी भी वादक की क्षमता को दर्शाती है। रेली के बोल बहुत कम होते हैं यह दो प्रकार के होते हैं एक रेल आता तथा कायदे से निर्मित खेला रैली को द्रुत गति में ही बजाना चाहिए या ठुमरी और ख्याल गायकी मैं भी उसका उपयोग हो जाता है बिल्कुल लगी और लड़ी की तरह ।रागों में solo वादन में जहां जहां पर आवश्यकता हो वहां इसका उपयोग बहुत ख़ूबसूरती के साथ किया जाता है । कैसे हुआ आविष्कार कुछ विद्वानों के अनुसार रेल के इंजन का आविष्कार हुआ तब उसकी ध्वनि से प्रभावित होकर विद्वानों ने तबले के बोलों को रेल की ध्वनि जैसा बनाने का प्रयास किया और वह सफल हुए और उसका नाम रेला रखा गया। जो वास्तविक लगता है रे ले में इस तरह के बोलूंगा प्रयोग किया जाता है कि वह बजने पर रेल की गति जैसा या रेल की ध्वनि जैसा प्रतीत हो जब रेल का इंजन दौड़ता है परियों पर तब उसमें जो भिन्न-भिन्न प्रकार की दुनियां निकलती है उसी की आवाज को तब लेकर बोलो...
आपके द्वारा किए गए महत्वपूर्ण प्रयास के लिए आपको हार्दिक बधाई। यह सामग्री सभी के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
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